सोमवार, 26 अगस्त 2019

वापिस कभी तुम मुड़ना नहीं।

















सफल होने से पहले
जो पड़ती मार है
असफल होना भी
किस्मत की बात है।

ये तो बस एक नई शुरुआत है
सफलता से होनी अभी मुलाकात है।।
जरा-सा धिट बन जाना
मेहनत से दोबारा हाथ मिलाना

प्रयास तुम हर बार करना
फिर से एक नई शुरुआत करना।
चेहरे पर मीठी-सी मुस्कान रखना
संघर्ष से तुम न कतराना।।

अपनी हार से
आंखे मिलाना
डर कितना भी हो
पर तुम ना घबराना।।

दोबारा असफल होने से
डरना नहीं
मुश्किलों को देखकर
रुकना नहीं।।

चाहे जो भी हो
पर वापिस कभी
तुम मुड़ना
नहीं।।

सोमवार, 19 अगस्त 2019

हर शाम ये सूरज ढलता है..

Her Sham ye Suraj dhalta hai हर शाम ये सूरज ढलता है..
हर शाम ये सूरज ढलता है
जाते हुए लम्हों से नजाने 
आखिर क्यों तू डरता है
साथ तेरे पास तेरे
कुछ नहीं रह जायेगा
सूरज की तरह एक दिन 
तू भी ढल जाएगा 
रात में,आकाश में
ब्रह्माण्ड में
कही तू भी 
छिप जायेगा
परंतु उस हालात में 
फिर भी तू मुस्कुराएगा!!

तुम्हें मुस्कुराना ही होगा
कही दूर किसी और का
जीवन चलाना ही होगा
आसमान का तारा बन
एक नया सौरमंडल
बनाना ही होगा
तभी तू महान
कहलाएगा
अंधेरी रात के बाद
फिर एक नया सवेरा आएगा।।

मंगलवार, 14 मई 2019

अच्छा लगता है...

अच्छा लगता है... Achha Lagta hai

अच्छा लगता है 
वो तितलियों का
उड़ना।
अच्छा लगता है
वो फूलों का
महकना।।

अच्छा लगता है 
वो चिड़ियों का 
चहकना।
अच्छा लगता है 
वो हवा का
बहकना।।

अच्छा लगता है 
वो बारिश का
बरसना।
अच्छा लगता है 
वो इन्द्रधनुष का
बनना।।

अच्छा लगता है 
वो सुबह की 
सैर करना।
अच्छा लगता है 
वो खुशियों को 
तस्वीरों में कैद करना।।

अच्छा लगता है
वो शब्दों से शब्दों को
मिलाना।
अच्छा लगता है 
अपनी वजह से वो दूसरों का 
मुस्कुराना।।

अच्छा लगता है 
वो संगीत की धुन पर
नाचना।
अच्छा लगता है
वो स्कूल की छुटटी होते ही
भागना।।

पता नहीं चलता कि 
क्या-क्या!!
अच्छा लगता है!
जब मन अच्छा हो तो 
सब कुछ 
अच्छा लगता है।।


शुक्रवार, 14 सितंबर 2018

इस "हिन्दी दिवस" मूषक पर पधारे ।।

इस "हिन्दी दिवस"

मूषक पर पधारे

अपनी "सोने की चिड़िया" को

चलो फिर से सवारें

जब चिड़िया शिकारी के

जाल में है फंस जाती

तब मूषक ही

जाल कुतर के

दिलाता उसे आजादी

कुतर के सारे

फंदो को

अब संवार दो

हिन्दी को

आग्रह है आपको

सभी को ये समझायें

कृप्या "मूषक" पर आयें

अपनी "मातृभाषा" को बचाएं

चलो अब "मातृभूमि का कर्ज़" चुकाएं।।

शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

भारत की वो शान अटल है।।

भारत की वो शान अटल है।।
रात अटल है,
दिन अटल है,
ये सूरज - ये चांद
अटल है।।




पशु अटल है,पंछी अटल है,

हरियाला ये जंगल
अटल है।।




पर्वत अटल है,मैदान अटल है,

ये धरती, ये आकाश
अटल है।।




पानी अटल है,आग अटल है,
नदिया की बहती

ये धारा
अटल है।।




आप अटल है,मैं अटल हूं,

मन के भीतर
कुछ बातें
अटल है।।




हर वो क्षण-क्षण अटल है,

जिसमे उनकी यादें
अटल है।
उस धरती का कण-कण
अटल है,
जिस धरती पर जन्में
अटल है।




वादे अटल है,इरादे अटल है,

जिनके उसूल और कायदे
अटल है।
अमर अटल है,
महान अटल है,
सदा जीवित वो इंसान
अटल है।।



अनोखी सी वो

पहचान
अटल है,
मीठी सी वो
मुस्कान
अटल है।।



भारत की वो पहचान अटल है,

भारत की वो
शान
अटल  है।।

अटल थे। अटल है। अटल रहेगें।।🙏🙏🙏
~यशवर्धन~