प्रकृति की कहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
प्रकृति की कहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

प्रकृति की कहानी


बात बड़ी है पुरानी,
थी प्रकृति की भी कहानी।
आज आपको भी है सुनानी,
एक ज़माने में प्रकृति थी रानी।

इस धरती पर उसका राज था,
मानव पर उसे बड़ा विश्वास था। 
परन्तु अपने फायदे के लिए मानव,
बन बैठा इस धरती का दानव।

जंगलों का कर सफ़ाया,
अपना घर है बनाया।
इतना करके भी ना माना,
पशु - पक्षियों को भी मारा।

अपने फायदे के लिये,
प्रदूषण को भी दिया बढ़ावा।
अपनी इस करनी पर,
अब होता है पछतावा।

अपनी इस अभी भी वक़्त है, हे मानव!
सुन लो मेरी ये पुकार,
रोक दो ये हाहाकार,
नहीं तो छा जायेगा इस धरती पर अंधकार!