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सोमवार, 19 अगस्त 2019

हर शाम ये सूरज ढलता है..

Her Sham ye Suraj dhalta hai हर शाम ये सूरज ढलता है..
हर शाम ये सूरज ढलता है
जाते हुए लम्हों से नजाने 
आखिर क्यों तू डरता है
साथ तेरे पास तेरे
कुछ नहीं रह जायेगा
सूरज की तरह एक दिन 
तू भी ढल जाएगा 
रात में,आकाश में
ब्रह्माण्ड में
कही तू भी 
छिप जायेगा
परंतु उस हालात में 
फिर भी तू मुस्कुराएगा!!

तुम्हें मुस्कुराना ही होगा
कही दूर किसी और का
जीवन चलाना ही होगा
आसमान का तारा बन
एक नया सौरमंडल
बनाना ही होगा
तभी तू महान
कहलाएगा
अंधेरी रात के बाद
फिर एक नया सवेरा आएगा।।