मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014
गुरुवार, 12 दिसंबर 2013
प्रकृति की कहानी
बात बड़ी है पुरानी,
थी प्रकृति की भी कहानी।
आज आपको भी है सुनानी,
एक ज़माने में प्रकृति थी रानी।
इस धरती पर उसका राज था,
मानव पर उसे बड़ा विश्वास था।
परन्तु अपने फायदे के लिए मानव,
बन बैठा इस धरती का दानव।
जंगलों का कर सफ़ाया,
अपना घर है बनाया।
इतना करके भी ना माना,
पशु - पक्षियों को भी मारा।
अपने फायदे के लिये,
प्रदूषण को भी दिया बढ़ावा।
अपनी इस करनी पर,
अब होता है पछतावा।
अपनी इस अभी भी वक़्त है, हे मानव!
सुन लो मेरी ये पुकार,
रोक दो ये हाहाकार,
नहीं तो छा जायेगा इस धरती पर अंधकार!
रविवार, 7 जुलाई 2013
फूल खिले है डाली - डाली
| चित्र साभार : yashvardhan09.blogspot.in |
रुत है ये मतवाली ।।
ये भी कहते कुछ गाकर ।
हँसते - रोते मुस्कुराकर ।।
कहते ये होकर दुखी ।
हमे मत तोड़ो कभी ।।
मत लो हमारे प्राण ।
आखिर हम में भी है जान।।
सोमवार, 17 जून 2013
देखो काले बादल आये ....
देखो काले बादल आये ।
नभ पर ये जमकर छाये ।।
गरजकर , ये बिजली कड़काते ।
संग में ये अपने वर्षा भी लाते ।।
देखो काले बादल आये ।
गर्मी को ये दूर भगाए ।।
मौसम को भी खुशहाल ।
खेतों में हरियाली फैलायें ।।
देखो काले बादल आये ।
बंजर को भी उपजाऊ बनाते ।।
कहीं - कहीं पर ये बाढ़ भी लाते ।
परन्तु अकाल को दूर भगाते ।।
देखो काले बादल आये ।
प्रकृति को भी ये भाये ।।
इस धरती को भी नहलाये ।
देखो काले बादल आये ।।
गुरुवार, 13 जून 2013
सदस्यता लें
संदेश (Atom)



