सोमवार, 25 मार्च 2013
शुक्रवार, 1 मार्च 2013
शनिवार, 9 फ़रवरी 2013
प्रकृति की गोद में .....
प्रकृति की गोद में,
खिलखिलाती ये धूप।
प्रकृति की गोद में,
कैसा ये रूप।।
प्रकृति की गोद में,
नदियों में बहता पानी।
प्रकृति की गोद में,
फिर उड़ती ये आंधी।।
प्रकृति की गोद में,
चलती ये हवाएँ।
प्रकृति की गोद में,
सूरज भी ये गुर्राये।।
प्रकृति की गोद में,
कहती ये हरियाली।
प्रकृति की गोद में,
क्या मौसम, क्या पानी।।
बुधवार, 5 दिसंबर 2012
ठंडी हवाएँ
ऐसे चलती ठंडी हवाएँ,
जैसे कोई गीत गाएँ ,
जब चली ठंडी पवन ,
खुश हुआ नीला गगन ।
आसमान में काले बादल आयें ,
छम - छम कर बरस जाएँ ,
जब - जब मेघा बरसे ,
खेतों में हरियाली फैले ।।
दिल को भी छू जाते ,
हरे - भरे पेड़ - पौधे ,
चिड़ियों की चहकती आवाज़ ,
मन सुला देती मेरा आज ।
ऐसे चलती ठंडी हवाएँ ,
जैसे कोई गीत गुनगुनाएँ ,
तन - मन में खुशियाँ लाएँ ,
ऐसे चलती ठंडी हवाएँ ।।
शनिवार, 10 नवंबर 2012
असफलता की राहों पर ......
असफलता की राहों पर ,
सफलता के गीत गाए ।
आसमान के तारों पर ,
वीरता के झंडे लगायें ।।
प्रतिभा और जुनून का कमाल ,
छोटी उम्र में बड़े धमाल ।
ऐसे भी थे नौजवान ,
मातृभूमि पर दिया बलिदान ।।
उन शहीदों को याद करके ,
आँखें नम हो जाती हैं ।
जिनकी याद में दुनिया सारी ,
खुशियों के दीप जलाती हैं ।।
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